किस्मत

सब से एक सबाल है। कोन कोन है जो किस्मत पर यकीन करता है। किस्मत होती है या खुद से लिख सकते हैं। आज तक किस्मत का खेल समझ नहीं आया। सब कहते हैं कि जो किस्मत में होगा । बही मिलेगा पर जो मिला है वो । किस्मत से मिला या खुद पाया। कहते… Continue reading किस्मत

संभालना

अब मैं संभाल नहीं पा रही हुं। मैं सब कुछ नहीं संभाल सकती। थक भी गई हुं संभालते संभालते। अजीब से रिश्तो में बंधी हुं । अजाद भी नहीं हो सकती हु खुद से भी कितना अजाद राहु । क्या सभालु और केसे । और किसलिए । पता है अब जिंदगी न अजीब सी दौड़… Continue reading संभालना

हां मैं हूं

ये क्यो पुछा कि मैं । कहा हुं। हां मैं हूं कहीं ना कहीं तो हुं । और ज़िन्दा भी हु। मुझे मालूम है में अभी भी। आपकी यादों में थोड़ी तो हुं। हां मैं हूं । थोड़ा खो गई हुं । पर कोसीस जरुर करती हुं कभी कभी खुद को खोजने की। हां मैं… Continue reading हां मैं हूं

सफर

सफर पर चल तो रहा हूं पर कहीं खो भी गया हूं य सफर अकेल ही क्यूं तय करना पड़ता है । कितने लोग थे साथ में कितने वादे थे मेरे साथ में। आज के इस सफर में कोई नहीं न साथ में न बात में । कितने लोगों को पीछे छोड़ दिया इस सफर… Continue reading सफर

तेरे शब्दों का

तेरे शब्दों का भी अजिब खेल है कभी रोला देते हैं कभी हंसा देते हैं। ***** ***** ****** ****** तेरे नाम से आज भी । दिल की धड़कन तेज हो जाती है। ***** ***** ***** ***** क्या बताऊं क्या समझऊ । ऐसा क्या बोलु जो मन ठहर जाएं।

दिल भी न

दिल भी न जाने क्यों वार वार धड़कना बंद कर देता है मैं समझाते समझाते थक गया हूं तु उसके लिए क्यों धड़कता है जो है ही नहीं है।

अभी में हारी नहीं हूं

अभी में हारी नहीं हूं अभी तो चलना सुरू किया है अभी रास्ते तय करना वाकी है । अभी टुटी भी नहीं हूं । अभी तो खुद को जोड़ना सुरू किया है। अभी जिती भी नहीं हूं मंजिल पाना वाकी है। अभी तो खुद से बातें भी नहीं की खुद को खुद से मिलना बाकी… Continue reading अभी में हारी नहीं हूं